मैं कस्बाई इंसान हूँ .. और मेरा परिचय इतना है की मैं बिलकुल अपने हिसाब से जीना पसंद करता हूँ ..एक समय था मुझे पत्रकार बनने की जिद ने काफी परेशान किया .. पापा की मौत के बाद उनकी प्रोविडेंट फंड और सेवा निधि के काफी पैसे घर में आये ... दिल्ली आया ... लगातार आया ..सारे पैसे खर्च कर डाले ...लेकिन टीवी पर चेहरा नहीं आया ...लिखना -पढना जानता हूँ .. बड़े लेखकों को पढ़ा भी है ..अफ़सोस पत्रकार नहीं बन पाया
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें